15 सितंबर 2026
बिहार के शिक्षकों ने सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान और लंबे समय से लंबित प्रोन्नति को लेकर अपनी आवाज फिर बुलंद की है। सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड क्षेत्र स्थित हाई स्कूल कटही में शिक्षकों की बैठक हुई, जिसमें शिक्षक हित से जुड़े इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बिहार विशिष्ट अध्यापक प्रधान शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव पंकज कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को शिक्षकों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान और उससे जुड़े सभी अनुमन्य लाभ उपलब्ध कराने चाहिए।
पूर्ण वेतनमान को लेकर क्या है मांग?
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद अब वेतन और सेवा सुविधाओं में भी न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगठन के प्रदेश महासचिव ने पूर्ण वेतनमान को शिक्षकों के सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया और सरकार से इस दिशा में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षक संगठन वेतनमान के साथ उससे जुड़े अनुमन्य लाभों को भी एक साथ लागू किए जाने की बात कर रहे हैं।
लंबित प्रोन्नति ने बढ़ाई नाराजगी
बैठक में सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं उठा। नियोजित शिक्षक, विशिष्ट शिक्षक और विद्यालय अध्यापकों की लंबित प्रोन्नति को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
पंकज कुमार सिंह ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिलना निराशाजनक है। संगठन के अनुसार प्रोन्नति का संबंध केवल पद बदलने से नहीं, बल्कि शिक्षक के सेवाकाल, मनोबल और करियर से भी है।
तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं दूर करने की मांग
शिक्षक संगठन ने सरकार से मांग की है कि लंबित प्रोन्नति की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए और इससे जुड़ी तकनीकी तथा प्रशासनिक अड़चनों को दूर किया जाए।
इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग उठाई गई, ताकि शिक्षकों को बार-बार अलग-अलग स्तर पर प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।
सरकार और शिक्षकों के बीच संवाद पर जोर
बैठक में यह बात भी सामने आई कि अगर सरकार शिक्षकों की समस्याओं का समाधान संवाद और सकारात्मक पहल के जरिए करती है, तो इससे शिक्षकों का मनोबल बढ़ सकता है और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
शिक्षक संगठन का तर्क है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था की उम्मीद तभी प्रभावी रूप से की जा सकती है, जब शिक्षकों के अधिकार, सम्मान और सेवा-सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए।
शिक्षकों ने क्या संकल्प लिया?
बैठक में मौजूद शिक्षकों ने सातवें वेतनमान, लंबित प्रोन्नति और अन्य शिक्षक हित से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का संकल्प लिया।
इससे संकेत मिलता है कि शिक्षक संगठन इन मांगों को सिर्फ बैठक तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि आगे भी सरकार के सामने सामूहिक रूप से उठाते रहेंगे।
क्या सरकार ने पूर्ण वेतनमान मंजूर कर दिया है?
इस बैठक की रिपोर्ट के आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता।
बैठक में शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान और लंबित प्रोन्नति का लाभ जल्द दे। रिपोर्ट में इन मांगों पर सरकार की ओर से कोई नया आदेश या अंतिम स्वीकृति दर्ज नहीं है।
इसलिए फिलहाल इसे शिक्षकों की मांग और सरकार से अपील के रूप में देखना सही होगा।
इस मामले को समझिए
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| बैठक | हाई स्कूल कटही, छातापुर प्रखंड, सुपौल |
| मुख्य मांग | 7वें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान |
| दूसरी बड़ी मांग | लंबित प्रोन्नति |
| संबंधित शिक्षक | नियोजित, विशिष्ट और विद्यालय अध्यापक |
| अतिरिक्त मांग | तकनीकी/प्रशासनिक बाधाएं दूर करने की |
| शिक्षकों की रणनीति | एकजुट होकर आवाज उठाने का संकल्प |
| सरकार का अंतिम आदेश | रिपोर्ट में उल्लेख नहीं |
OpinionJester का निष्कर्ष
बिहार में शिक्षकों की मांग अब केवल वेतन तक सीमित नहीं है। पूर्ण वेतनमान, उससे जुड़े अनुमन्य लाभ और वर्षों से लंबित प्रोन्नति तीनों मुद्दे शिक्षक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण बन गए हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई नया अंतिम आदेश इस रिपोर्ट में सामने नहीं आया है। इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार शिक्षक संगठनों के साथ संवाद के बाद वेतनमान और प्रोन्नति पर क्या ठोस निर्णय लेती है।






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