पहली शादी रहते दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन, AFT ने दी राहत

15 सितंबर 2026

सशस्त्र बलों से जुड़े पेंशन मामलों में चंडीगढ़ बेंच, Armed Forces Tribunal (AFT) का एक अहम फैसला सामने आया है। ट्रिब्यूनल ने एक दिवंगत सेना हवलदार की दूसरी पत्नी को ordinary family pension देने का आदेश दिया है, हालांकि उसने यह भी माना कि पहली पत्नी के जीवित रहते हुई दूसरी शादी Hindu Marriage Act, 1955 के तहत कानूनी रूप से void थी।

यह फैसला खास परिस्थितियों पर आधारित है। ट्रिब्यूनल ने दूसरी शादी को वैध घोषित नहीं किया, बल्कि लंबे समय तक साथ रहने, पहली पत्नी की सहमति, संतान और सेना के आधिकारिक रिकॉर्ड जैसे तथ्यों को देखते हुए दूसरी पत्नी के maintenance और pensionary benefits के दावे को स्वीकार किया।

क्या था पूरा मामला?

मामला दिवंगत सेना हवलदार जगत सिंह की पारिवारिक पेंशन से जुड़ा था। उन्होंने 1 जनवरी 1940 को मोहिंदर कौर से शादी की और 9 जुलाई 1940 को भारतीय सेना में भर्ती हुए। पहली शादी से कोई संतान नहीं थी।

इसके बाद 13 अप्रैल 1970 को, पहली पत्नी के जीवित रहते, जगत सिंह ने सतनाम कौर से दूसरी शादी की। AFT के रिकॉर्ड के अनुसार पहली पत्नी ने इस विवाह के लिए सहमति दी थी और इस संबंध से एक बेटी भी हुई। सेना के service documents में मोहिंदर कौर, सतनाम कौर और बेटी का नाम दर्ज था।

यानी सरकारी रिकॉर्ड और परिवार की वास्तविक स्थिति में दूसरी पत्नी और उनकी बेटी का उल्लेख मौजूद था।

पहली पत्नी की सहमति का क्या महत्व रहा?

AFT ने इस मामले में पहली पत्नी की सहमति को एक महत्वपूर्ण तथ्य माना। रिकॉर्ड के अनुसार 30 मार्च 1970 को जगत सिंह और मोहिंदर कौर ने शपथपत्र दिए थे, जिनमें पहली शादी से संतान न होने और दूसरी शादी की अनुमति दिए जाने का उल्लेख था। जगत सिंह ने पहली पत्नी की जीवनभर देखभाल की जिम्मेदारी भी ली थी।

हालांकि, पहली पत्नी की सहमति होने से दूसरी शादी अपने आप कानूनी रूप से वैध नहीं हो गई। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट रूप से माना कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी Hindu Marriage Act की Sections 5, 7 और 11 के तहत void थी।

फिर दूसरी पत्नी को पेंशन क्यों मिली?

यहीं इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जगत सिंह की मृत्यु 13 फरवरी 1998 को हुई। इसके बाद पहली पत्नी मोहिंदर कौर को 14 फरवरी 1998 से family pension मिलने लगी। उनकी मृत्यु 9 फरवरी 2017 को हुई और उसके बाद पेंशन बंद हो गई। सतनाम कौर ने 10 फरवरी 2017 से अपने लिए ordinary family pension की मांग की।

सरकार ने 15 सितंबर 2018 के पत्र के जरिए उनका दावा खारिज कर दिया। इसमें पुराने service records उपलब्ध न होने और Army regulations में plural marriage से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया गया।

सतनाम कौर ने इसके खिलाफ AFT का दरवाजा खटखटाया।

AFT ने किन तथ्यों पर भरोसा किया?

ट्रिब्यूनल ने केवल शादी के दस्तावेज को नहीं देखा। उसने पूरे मामले की परिस्थितियों को एक साथ परखा।

मुख्य तथ्य थे:

लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहना,
पहली पत्नी की सहमति,
इस संबंध से बेटी का जन्म,
और Army service records में दूसरी पत्नी और बेटी के नाम का दर्ज होना।

AFT ने यह भी कहा कि लंबे और निरंतर cohabitation से विवाह के पक्ष में presumption पैदा हो सकती है। Supreme Court के 2023 के Smt. Shiramabai & Ors. v. The Captain, Record Officer and Another फैसले का भी हवाला दिया गया।

क्या AFT ने दूसरी शादी को वैध कर दिया?

नहीं।

यह फर्क समझना बहुत जरूरी है।

AFT ने खुद माना कि दूसरी शादी legally void थी। लेकिन उसने pension claim को अलग प्रश्न के रूप में देखा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस विशेष मामले में लंबे cohabitation और अन्य परिस्थितियों के आधार पर दूसरी पत्नी को पहली पत्नी की मृत्यु के बाद maintenance और pensionary benefits मिल सकते हैं।

इसलिए इस आदेश को “दूसरी शादी को कानूनी मान्यता” देने वाला फैसला कहना सही नहीं होगा।

2018 की अस्वीकृति रद्द

AFT ने सरकार की ओर से 15 सितंबर 2018 को जारी rejection letter को quash कर दिया। इसके बाद अधिकारियों को सतनाम कौर को 10 फरवरी 2017 से ordinary family pension देने का निर्देश दिया गया।

इसके साथ उन्हें consequential benefits भी देने होंगे।

ब्याज भी मिलेगा

ट्रिब्यूनल ने pension के साथ 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया है। भुगतान certified order मिलने के तीन महीने के भीतर किया जाना है।

अगर निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज की दर बढ़कर 8 प्रतिशत प्रति वर्ष हो जाएगी।

यह हिस्सा pensioners के लिए खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिर्फ बकाया pension मिलना ही नहीं, बल्कि देरी की स्थिति में ब्याज की सुरक्षा भी आदेश का हिस्सा है।

आठ साल चला कानूनी विवाद

सतनाम कौर का मामला 2018 में शुरू हुआ था, जब विभाग ने उनकी family pension की मांग खारिज कर दी थी। AFT के इस आदेश के साथ करीब आठ साल चला विवाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा।

ट्रिब्यूनल ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में हर केस के तथ्य अलग हो सकते हैं। दूसरे मामलों में void second marriage को लेकर ज्यादा सख्त रुख अपनाया गया है। इसलिए इस फैसले को सभी मामलों पर automatically लागू होने वाला नियम नहीं माना जा सकता।

Army pension cases के लिए इसका क्या मतलब?

इस फैसले का महत्व खास तौर पर उन मामलों में समझ आता है जहां लंबे समय से साथ रहना, पारिवारिक स्थिति और official service records एक स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी दूसरी पत्नी को सिर्फ लंबे साथ रहने के आधार पर family pension मिल जाएगी। AFT का आदेश इस मामले के specific facts पर आधारित है।

इसलिए future cases में marriage records, service records, family details, cohabitation और लागू pension regulations सभी का महत्व बना रहेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बातें

मुद्दाजानकारी
ट्रिब्यूनलArmed Forces Tribunal, Chandigarh Bench
आदेश3 सितंबर 2026
सैन्यकर्मीहवलदार जगत सिंह
दूसरी पत्नीसतनाम कौर
दूसरी शादीपहली पत्नी के जीवित रहते हुई
AFT का निष्कर्षशादी Hindu Marriage Act के तहत void
पेंशन10 फरवरी 2017 से ordinary family pension
ब्याज6% प्रति वर्ष
भुगतान की समयसीमाCertified order मिलने के 3 महीने
देरी पर ब्याज8% प्रति वर्ष
मुख्य आधारLong cohabitation, consent, daughter, Army records

OpinionJester का निष्कर्ष

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AFT ने एक जटिल स्थिति में “विवाह की वैधता” और “पेंशन लाभ” को पूरी तरह एक ही सवाल नहीं माना। दूसरी शादी को void मानने के बावजूद, ट्रिब्यूनल ने लंबे सहजीवन, पहली पत्नी की सहमति, संतान और Army records जैसे तथ्यों के आधार पर पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को family pension देने का रास्ता खोला।

लेकिन इसे एक सामान्य नियम के रूप में देखना ठीक नहीं होगा। दूसरी शादी को वैध घोषित नहीं किया गया है, और राहत इस मामले की विशेष परिस्थितियों पर आधारित है।

साथ ही, pension का भुगतान 10 फरवरी 2017 से, 6% ब्याज के साथ और तीन महीने की समयसीमा में करने का निर्देश इस आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है

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