छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों-पेंशनरों का बड़ा प्रदर्शन 11 सितंबर को
रायपुर | 7 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 11 सितंबर को इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 के सामने संयुक्त प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन भोजनावकाश के दौरान किया जाएगा।
संगठनों का कहना है कि लंबे समय से अपनी मांगें सरकार के सामने रखने और अधिकारियों से चर्चा करने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। अब अलग-अलग संगठनों को एक मंच पर लाकर सरकार का ध्यान लंबित मांगों की ओर आकर्षित करने की तैयारी है।
11 सितंबर को क्यों होगा प्रदर्शन?
छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले शुरू किए गए ‘एक मांग-एक मंच’ अभियान को अब विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि कई आर्थिक लाभ समय पर नहीं मिल रहे हैं। इनमें खास तौर पर महंगाई भत्ते को केंद्र के समान देय तिथि से देने और लंबे समय से लंबित DA एरियर के भुगतान की मांग शामिल है।
वहीं, अनियमित कर्मचारी नेता गोपाल प्रसाद साहू ने नियमितीकरण, हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और न्यूनतम वेतन जैसी मांगें उठाई हैं। उन्होंने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
ये हैं कर्मचारियों और पेंशनरों की 5 प्रमुख मांगें
1. अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण
संगठनों की पहली प्रमुख मांग है कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाए। साथ ही जिन कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया है, उन्हें वापस बहाल करने की मांग भी की जा रही है।
2. नगरीय निकाय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन
नगरीय निकायों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की मांग आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कई राज्यों में पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों के बीच लगातार चर्चा और आंदोलन होते रहे हैं।
3. स्वास्थ्य विभाग में ठेका व्यवस्था खत्म करने की मांग
कर्मचारी संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग में ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने की मांग की है। उनका तर्क है कि नियमित रोजगार और सेवा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
4. 20 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
कर्मचारी और पेंशनर संगठन अपने लिए 20 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की मांग कर रहे हैं।
इस मांग का उद्देश्य कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इलाज के समय तत्काल भुगतान के बोझ से राहत दिलाना है।
5. जनवरी 2026 से DA और 86 महीने के एरियर का भुगतान
पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण मांग जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता देने तथा लंबित 86 महीने के DA एरियर का भुगतान करने से संबंधित है। संगठन चाहते हैं कि महंगाई भत्ता केंद्र के समान देय तिथि से दिया जाए।
सरकार से बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, इन मुद्दों को लेकर वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और वित्त सचिव के साथ बातचीत हो चुकी है। लेकिन संगठनों का कहना है कि बातचीत के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद संयुक्त प्रदर्शन का निर्णय लिया गया।
इससे संकेत मिलता है कि कर्मचारी संगठन फिलहाल प्रदर्शन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या आंदोलन आगे भी बढ़ सकता है?
संगठनों ने संकेत दिया है कि 11 सितंबर के प्रदर्शन के बाद भी यदि सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में अगला निर्णय लिया जा सकता है। यानी 11 सितंबर का प्रदर्शन इस पूरे आंदोलन का अंतिम चरण जरूरी नहीं है।
कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रदर्शन?
इस प्रदर्शन में केवल एक मुद्दा नहीं बल्कि पेंशन, महंगाई भत्ता, नियमितीकरण, रोजगार सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे अलग-अलग विषय एक साथ उठाए जा रहे हैं।
खास तौर पर 86 महीने के DA एरियर, नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए OPS और 20 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की मांग का सीधा संबंध कर्मचारियों और पेंशनरों की आर्थिक सुरक्षा से है।
एक नजर में
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| प्रदर्शन की तारीख | 11 सितंबर 2026 |
| स्थान | इंद्रावती भवन, गेट नंबर-3, रायपुर |
| समय | भोजनावकाश के दौरान |
| कौन शामिल होंगे | कर्मचारी और पेंशनर संगठन |
| प्रमुख मुद्दे | OPS, नियमितीकरण, स्वास्थ्य सुविधा, DA और एरियर |
| DA एरियर की मांग | 86 महीने |
| कैशलेस उपचार | 20 लाख रुपये तक |
OpinionJester निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में 11 सितंबर का प्रदर्शन कर्मचारियों और पेंशनरों की कई लंबित मांगों को एक मंच पर लाने की कोशिश है। पुरानी पेंशन, DA एरियर, नियमितीकरण और स्वास्थ्य सुविधा जैसे मुद्दे सीधे कर्मचारियों के आर्थिक और सेवा हितों से जुड़े हैं।
फिलहाल यह प्रदर्शन संगठनों की घोषित मांगों और सरकार से समाधान की मांग तक सीमित है। आगे सरकार की प्रतिक्रिया और 11 सितंबर के बाद संगठनों की रणनीति से तय होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है।
स्रोत: अमर उजाला की 6 सितंबर 2026 की रायपुर रिपोर्ट। (Amar Ujala)
नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र भाषा में तैयार किया गया है। कर्मचारी संगठनों द्वारा उठाई गई मांगों को उनके पक्ष/दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है; इनके स्वीकार या लागू होने का अर्थ सरकारी मंजूरी नहीं है।






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