नई दिल्ली | 10 सितंबर 2026
8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर अब पेंशनरों की एक बड़ी चिंता सामने आई है। Retired Employees Welfare Association (REWA) ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर आयोग की Terms of Reference (ToR) में बदलाव की मांग की है, ताकि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन के संशोधन को साफ तौर पर 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए।
यह मांग ऐसे समय में आई है जब पेंशनर संगठन इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि मौजूदा ToR में पुराने पेंशनरों के लिए पेंशन संशोधन का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है।
REWA की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
REWA ने 7 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में कहा है कि लगभग 69 लाख पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि 8वां वेतन आयोग उनकी पेंशन और फैमिली पेंशन की समीक्षा करेगा या नहीं। यह आंकड़ा और चिंता REWA के पत्र में दी गई है।
संगठन का कहना है कि इस भ्रम की मुख्य वजह 8वें वेतन आयोग के ToR का Point 2(e) है।
ToR में क्या लिखा है?
REWA के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग के ToR के बिंदु 2(e) में कहा गया है कि आयोग कर्मचारियों के लिए Death-cum-Retirement Gratuity और Pension, जिसमें NPS/UPS तथा NPS के बाहर की व्यवस्था शामिल है, की संरचना की समीक्षा करेगा।
संगठन का सवाल यह है कि इस भाषा में पहले से सेवानिवृत्त हो चुके पेंशनरों और फैमिली पेंशनरों की पेंशन संशोधन की बात स्पष्ट रूप से क्यों नहीं कही गई।
यही अस्पष्टता अब पेंशनर संगठनों की चिंता का कारण बनी हुई है।
पुराने वेतन आयोगों में क्या था?
REWA ने अपने पत्र में 7वें केंद्रीय वेतन आयोग का उदाहरण दिया है। संगठन के अनुसार, 7वें CPC के ToR में “revision of pre-retirement pension” का स्पष्ट उल्लेख था।
REWA ने यह भी कहा कि 6वें और 5वें वेतन आयोग के ToR में “Pensioners and Family Pensioners” शब्दों का स्पष्ट उल्लेख किया गया था।
यानी संगठन का मूल तर्क यह है कि पिछले आयोगों में पुराने पेंशनरों के संदर्भ को स्पष्ट रखा गया था, जबकि मौजूदा ToR में ऐसी भाषा दिखाई नहीं देती।
क्या सरकार ने पुराने पेंशनरों को बाहर कर दिया है?
अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। REWA ने ToR की मौजूदा भाषा को लेकर चिंता जताई है और उसमें स्पष्ट संशोधन की मांग की है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में सरकार की ओर से ऐसा कोई अंतिम निर्णय नहीं है कि 1 जनवरी 2026 से पहले के पेंशनरों को 8वें वेतन आयोग से बाहर रखा गया है।
इसलिए फिलहाल मामला स्पष्टीकरण और ToR में स्पष्ट शब्द जोड़ने की मांग का है, न कि पुराने पेंशनरों को बाहर करने के किसी घोषित सरकारी फैसले का।
REWA ने प्रधानमंत्री से क्या मांग की?
एसोसिएशन ने अपनी मांग काफी स्पष्ट रखी है।
उसने कहा है कि 3 नवंबर 2025 को जारी 8वें वेतन आयोग के ToR में संशोधन करके स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए कि आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त सभी पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की Pension/Family Pension Revision पर भी सिफारिशें करेगा।
REWA ने यह भी कहा है कि जब तक औपचारिक संशोधन नहीं किया जाता, तब तक सरकार को कम से कम एक स्पष्टीकरण या Press Release जारी करना चाहिए, ताकि पेंशनरों के बीच बना भ्रम दूर हो सके।
Finance Ministry को पहले भी लिखा जा चुका है
REWA के पत्र के अनुसार, संगठन ने इस मुद्दे को लेकर पहले वित्त मंत्री और वित्त सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा था।
संगठन का दावा है कि अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण पेंशनर संगठनों और सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर चर्चा जारी है।
यही वजह है कि अब संगठन ने सीधे प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप और स्पष्टता की मांग की है।
पेंशनरों के लिए यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
पेंशनर के लिए वेतन संशोधन सिर्फ एक कागजी बदलाव नहीं होता। अगर नया वेतन आयोग उनकी पेंशन संरचना में संशोधन की सिफारिश करता है, तो इसका असर उनकी मासिक पेंशन, फैमिली पेंशन और भविष्य में मिलने वाले संबंधित लाभों पर पड़ सकता है।
इसीलिए पुराने पेंशनरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वे 8वें CPC की समीक्षा के दायरे में हैं या नहीं।
अभी असली परेशानी यही है कि उन्हें स्पष्ट उत्तर नहीं मिला है।
1 जनवरी 2026 की तारीख क्यों अहम है?
8वें वेतन आयोग को लेकर 1 जनवरी 2026 एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। REWA विशेष रूप से मांग कर रही है कि इस तारीख से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों और फैमिली पेंशनरों का नाम ToR में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
इससे भविष्य में यह विवाद नहीं रहेगा कि आयोग की सिफारिशें किस श्रेणी के पेंशनरों पर लागू होंगी।
क्या अभी पेंशन बढ़ने वाली है?
नहीं, इस पत्र से अभी पेंशन बढ़ने का कोई सरकारी फैसला नहीं हुआ है।
यह सिर्फ REWA की ओर से की गई मांग है। पेंशन में वास्तविक संशोधन तभी होगा जब 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें देगा और सरकार उस पर निर्णय लेगी।
इस समय सबसे बड़ा मुद्दा पेंशनरों की eligibility को ToR में स्पष्ट करना है।
आगे क्या हो सकता है?
अब नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर रहेगी।
यदि सरकार ToR में संशोधन करती है या अलग से clarification जारी करती है, तो पुराने पेंशनरों की चिंता काफी हद तक दूर हो सकती है। दूसरी तरफ, यदि कोई स्पष्टता नहीं आती है, तो पेंशनर संगठन इस मुद्दे को आगे भी उठा सकते हैं।
फिलहाल REWA का पत्र यह दिखाता है कि 8वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन का मुद्दा अब कर्मचारियों के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारियों के बीच भी बड़ा विषय बन चुका है।
एक नजर में
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| संगठन | Retired Employees Welfare Association (REWA) |
| पत्र की तारीख | 7 सितंबर 2026 |
| पत्र किसे | प्रधानमंत्री |
| मुख्य मांग | ToR में Pension/Family Pension Revision स्पष्ट करना |
| संबंधित ToR | Point 2(e) |
| चिंतित पेंशनर | REWA के अनुसार लगभग 69 लाख |
| मांग का कट-ऑफ | 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनर |
| वैकल्पिक मांग | तत्काल सरकारी clarification/Press Release |
| क्या पेंशन वृद्धि मंजूर हुई? | नहीं |
| क्या पुराने पेंशनर आधिकारिक रूप से बाहर किए गए हैं? | ऐसा कोई अंतिम सरकारी निर्णय उपलब्ध नहीं |
OpinionJester का निष्कर्ष
8वें वेतन आयोग में पुराने पेंशनरों की पेंशन संशोधन को लेकर उठी यह मांग फिलहाल सरकार से स्पष्टता मांगने का मामला है। REWA का कहना है कि ToR में पहले से सेवानिवृत्त पेंशनरों और फैमिली पेंशनरों का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से लाखों लोगों में चिंता पैदा हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी यह घोषित नहीं हुआ है कि 1 जनवरी 2026 से पहले के पेंशनरों को 8वें वेतन आयोग से बाहर रखा गया है। इसलिए फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सरकार के clarification या ToR में संभावित संशोधन का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।
स्रोत: Retired Employees Welfare Association का प्रधानमंत्री को 7 सितंबर 2026 का पत्र ।





