नई दिल्ली | 7 सितंबर 2026
सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPFs) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की डेप्युटेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत का सवाल खास तौर पर उन 46 IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन को लेकर है, जिन्हें 23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CAPFs में भेजा गया।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने 2 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय (MHA) के सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा कि इन नियुक्तियों के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई और क्या संबंधित CAPF या विभाग की ओर से बाकायदा डेप्युटेशन की मांग की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद CAPFs में कैडर अधिकारियों के प्रमोशन, कैडर प्रबंधन और वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन से जुड़ा है।
23 मई 2025 को Sanjay Prakash & Ors. v. Union of India & Ors. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CAPFs से जुड़े कैडर और सेवा संरचना पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि CAPFs को Organised Group-A Services (OGAS) के लाभ और उससे जुड़े कैडर संबंधी उपचार मिलना चाहिए। साथ ही, अदालत ने SAG यानी Senior Administrative Grade तक डेप्युटेशन के लिए निर्धारित पदों की संख्या को समय के साथ धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी, जिसके लिए लगभग दो साल की बाहरी समय-सीमा का संकेत दिया गया था।
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य CAPF कैडर अधिकारियों के करियर में लंबे समय से चली आ रही ठहराव की समस्या को कम करना और उन्हें अधिक प्रमोशनल अवसर उपलब्ध कराना था।
फिर 46 IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन क्यों हुई?
गृह मंत्रालय के सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार, 23 मई 2025 के फैसले के बाद 46 IPS अधिकारियों को पांच प्रमुख CAPFs में डेप्युटेशन पर भेजा गया।
इनमें:
- BSF: 13 अधिकारी
- CISF: 11 अधिकारी
- CRPF: 9 अधिकारी
- SSB: 7 अधिकारी
- ITBP: 6 अधिकारी
कुल 46 अधिकारियों में 2 SP, 26 DIG और 18 IG स्तर के अधिकारी शामिल बताए गए हैं।
यही आंकड़ा अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, क्योंकि 2025 के फैसले में अदालत ने SAG तक डेप्युटेशन पदों को कम करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से क्या पूछा?
अदालत ने फिलहाल यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि ये डेप्युटेशन अवैध हैं। लेकिन उसने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा है कि नियुक्तियों के पीछे वास्तविक प्रशासनिक प्रक्रिया क्या थी।
मुख्य सवाल हैं:
क्या संबंधित CAPF या borrowing department ने पहले औपचारिक Requisition भेजी थी?
IPS अधिकारियों को डेप्युटेशन पर भेजने की प्रक्रिया क्या रही?
23 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी इन अधिकारियों की डेप्युटेशन क्यों की गई?
अदालत ने कहा है कि इन सवालों का जवाब मिलने के बाद ही आगे आवश्यक आदेशों पर विचार किया जाएगा।
मामला अवमानना की कार्यवाही से भी जुड़ा
सुप्रीम कोर्ट इस मामले को महज प्रशासनिक विवाद के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि 2025 के अपने फैसले के अनुपालन की भी निगरानी कर रहा है।
मामले में गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर की गई हैं। अदालत ने MHA और Department of Personnel and Training (DoPT) के सचिवों से 2025 के फैसले को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने वाले हलफनामे भी मांगे थे।
MHA सचिव को अब इस मामले पर दो सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण वाला हलफनामा दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।
2026 के नए कानून से क्यों बढ़ी संवेदनशीलता?
इस विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू Central Armed Police Forces (General Administration) Act, 2026 है।
उपलब्ध विधायी विवरण के अनुसार, नए कानून में कुछ वरिष्ठ CAPF पदों पर IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन के लिए स्पष्ट प्रावधान रखे गए हैं। इनमें Inspector General के 50% पद, Additional Director General के कम से कम 67% पद, जबकि Director General और Special Director General के सभी पद IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन से भरे जाने का प्रावधान शामिल है।
यही कारण है कि 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 2026 के कानून के बीच संबंध अब विशेष महत्व रखता है। हाल ही में इस कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। उस चुनौती में याचिकाकर्ताओं ने कानून पर संवैधानिक आधारों और सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के संदर्भ में सवाल उठाए हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजर गृह मंत्रालय के जवाब पर है। यदि सरकार अपने हलफनामे में यह स्पष्ट कर देती है कि सभी डेप्युटेशन संबंधित नियमों और प्रशासनिक requisition के आधार पर की गई थीं, तो अदालत उस स्पष्टीकरण पर विचार करेगी।
वहीं, अगर सुप्रीम कोर्ट को यह लगे कि 2025 के आदेश की भावना या निर्देशों के अनुरूप पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए, तो आगे अनुपालन से संबंधित निर्देश दिए जा सकते हैं।
फिलहाल अदालत ने 46 IPS अधिकारियों की डेप्युटेशन पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। उसने केवल केंद्र से यह जवाब मांगा है कि डेप्युटेशन का आधार क्या था और 2025 के फैसले के बाद ऐसा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। यही स्पष्टीकरण इस विवाद की अगली दिशा तय करेगा।
मामला एक नजर में
मामला: Mahendra Singh Deo v. Govind Mohan & Others
संबंधित पुराना फैसला: Sanjay Prakash & Ors. v. Union of India & Ors.
2025 का फैसला: 23 मई 2025
नई सुनवाई का आदेश: 2 सितंबर 2026
डेप्युटेशन पर भेजे गए IPS अधिकारी: 46
अगली सुनवाई: 22 सितंबर 2026, दोपहर 2 बजे
स्रोत: सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के फैसले, 2 सितंबर 2026 के आदेश से संबंधित रिपोर्टिंग और उपलब्ध विधायी विवरण।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय अभी बाकी है।






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