चंडीगढ़ | 13 सितंबर 2026
अग्निपथ योजना लागू होने के बाद पंजाब से सिख रेजिमेंट में होने वाली भर्ती में जो गिरावट दिखाई दी थी, अब उसमें सुधार के संकेत मिल रहे हैं। सेना ने पंजाब के युवाओं को सैन्य सेवा के लिए फिर से आकर्षित करने के लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू किए और इसका असर भर्ती के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में सिख रेजिमेंट के उपलब्ध पदों में करीब 30% ही भरे जा सके थे, लेकिन 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70% तक पहुंच गया।
भर्ती में गिरावट क्यों आई थी?
2022 में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद सिख रेजिमेंट में भर्ती को लेकर स्थिति बदल गई। सेना के अधिकारियों के मुताबिक, अग्निपथ योजना को लेकर नकारात्मक धारणा, चार साल की सेवा के बाद रोजगार को लेकर चिंता और पंजाब के युवाओं में विदेश जाने की बढ़ती चाहत जैसे कारणों ने भर्ती को प्रभावित किया।
यानी समस्या सिर्फ भर्ती प्रक्रिया की नहीं थी। युवाओं के सामने यह सवाल भी था कि अग्निवीर के रूप में सेवा पूरी करने के बाद उनका आगे का करियर किस दिशा में जाएगा।
सेना ने खुद संभाली जागरूकता की कमान
भर्ती में कमी को देखते हुए सेना ने केवल विज्ञापन या ऑनलाइन जानकारी तक खुद को सीमित नहीं रखा। सिख रेजिमेंटल सेंटर, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जमीनी इकाइयां और पूर्व सैनिक एक साथ इस अभियान में जुड़े।
रेजिमेंट की टीमों ने भर्ती स्थलों का दौरा किया, गांवों के सरपंचों को जोड़ा और स्थानीय लोगों के साथ बातचीत की। मकसद था कि युवाओं को भर्ती प्रक्रिया, सैन्य सेवा और उपलब्ध अवसरों के बारे में सीधे और स्पष्ट तरीके से जानकारी मिले।
यह तरीका खास इसलिए था क्योंकि पंजाब में सेना की नौकरी की परंपरा को केवल रोजगार के नजरिए से नहीं देखा जाता। कई परिवारों में पीढ़ियों से सेना में जाने की परंपरा रही है।
2025-26 में कितना हुआ सुधार?
भर्ती के आंकड़ों में सुधार इस अभियान की सबसे स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।
जहां 2024-25 में केवल लगभग 30% रिक्तियां भरी गई थीं, वहीं अगले साल यह अनुपात बढ़कर करीब 70% हो गया। यानी एक साल में भर्ती पूर्ति के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
हालांकि यह अभी भी 100% नहीं है, लेकिन सेना के लिए यह संकेत जरूर है कि सही जानकारी और जमीनी संपर्क के जरिए युवाओं की रुचि वापस लाई जा सकती है।
पंजाब के युवाओं की भूमिका कितनी बड़ी है?
रिपोर्ट के अनुसार, सिख रेजिमेंट के अलावा सिख लाइट इन्फैंट्री और पंजाब रेजिमेंट में भी पंजाब से सैनिकों की भर्ती होती है। इन तीनों संरचनाओं में करीब 20 नियमित बटालियन हैं, जबकि National Rifles और Territorial Army की कई बटालियन भी हैं।
पंजाब से सेना में हर साल लगभग 8,000 पदों पर भर्ती निकलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि वास्तविक संख्या हर साल retirements और service exits के कारण बदल सकती है।
इसलिए पंजाब में सेना की भर्ती केवल एक रेजिमेंट का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के करियर से जुड़ा विषय है।
मुख्यमंत्री और सेना प्रमुख की बैठक में भी उठा मुद्दा
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने पंजाब के मुख्यमंत्री और सेना प्रमुख के बीच हुई बैठक में पंजाब से सेना में भर्ती बढ़ाने, भर्ती की संख्या बढ़ाने के उपायों और अग्निवीरों की सेवा पूरी होने के बाद रोजगार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।
यह बताता है कि भर्ती को लेकर चिंता सिर्फ रेजिमेंट या भर्ती केंद्र तक सीमित नहीं है। राज्य स्तर और सेना के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी यह मुद्दा चर्चा में है।
सिख रेजिमेंट की अलग पहचान
सिख रेजिमेंट का इतिहास 1846 से शुरू होता है। आजादी से पहले इसने दोनों विश्व युद्धों समेत कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। आजादी के बाद भी रेजिमेंट ने भारत की प्रमुख लड़ाइयों और अभियानों में भाग लिया।
रेजिमेंट को मिले सैन्य सम्मानों की सूची भी काफी लंबी है। रिपोर्ट में इसके नाम 14 Victoria Cross, 2 Param Vir Chakra, 4 Ashoka Chakra, 75 Battle Honours और 38 Theatre Honours बताए गए हैं।
यही सैन्य विरासत पंजाब के युवाओं के बीच इसकी पहचान को मजबूत बनाती रही है।
क्या अग्निपथ योजना ही एकमात्र कारण थी?
सेना से जुड़े पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. सुजलाना (सेवानिवृत्त) ने रिपोर्ट में भर्ती में गिरावट के पीछे कई कारण बताए। इनमें अग्निपथ को लेकर नकारात्मक धारणा, चार साल के बाद रोजगार को लेकर अनिश्चितता और विदेश जाने का रुझान प्रमुख बताए गए।
इसलिए मौजूदा सुधार को भी केवल एक कारण से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। सेना का outreach campaign, स्थानीय स्तर पर संवाद और युवाओं तक सही जानकारी पहुंचाना भी इसमें भूमिका निभा सकता है।
क्या युवाओं की रुचि पूरी तरह वापस आ गई है?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
30% से 70% तक पहुंचना निश्चित रूप से बड़ा सुधार है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भर्ती से जुड़ी सारी समस्याएं खत्म हो गई हैं। अभी भी रोजगार, अग्निवीर की सेवा अवधि और सेवा के बाद career options जैसे सवाल युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट में सेना की ओर से इन मुद्दों पर प्रयास जारी रहने की बात सामने आती है।
इस खबर को समझिए
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| योजना के बाद बदलाव | अग्निपथ लागू होने के बाद भर्ती में गिरावट |
| 2024-25 भर्ती पूर्ति | लगभग 30% |
| 2025-26 भर्ती पूर्ति | लगभग 70% |
| मुख्य प्रयास | Ground-level awareness campaign |
| शामिल पक्ष | सेना अधिकारी, रेजिमेंटल सेंटर, यूनिट्स, पूर्व सैनिक |
| पंजाब से वार्षिक भर्ती | लगभग 8,000 पद |
| प्रमुख रेजिमेंट | सिख रेजिमेंट, सिख लाइट इन्फैंट्री, पंजाब रेजिमेंट |
| अहम मुद्दे | भर्ती, अग्निवीर के बाद रोजगार, युवाओं का विदेश रुख |
OpinionJester का निष्कर्ष
पंजाब से सिख रेजिमेंट में भर्ती के आंकड़ों में 30% से लगभग 70% तक का सुधार यह संकेत जरूर देता है कि सेना की जमीनी पहुंच और युवाओं से सीधा संवाद असरदार हो सकता है।
लेकिन असली चुनौती सिर्फ भर्ती बढ़ाना नहीं है। युवाओं के मन में अग्निवीर की चार साल की सेवा, उसके बाद रोजगार और भविष्य की स्थिरता को लेकर जो सवाल हैं, उनका स्पष्ट जवाब देना भी उतना ही जरूरी है।
सिख रेजिमेंट की पुरानी सैन्य परंपरा और पंजाब की सेना से जुड़ी मजबूत सामाजिक विरासत के बावजूद आज का युवा अपने करियर को लेकर पहले से ज्यादा व्यावहारिक सवाल पूछ रहा है। सेना का मौजूदा अभियान इसी बदलती सोच के बीच भरोसा फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।





