# UPNL कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन और DA पर नए निर्देश, 3 चरणों में मिलेगा लाभ

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- Published: 2026-09-16T10:42:03+05:30
- Author: OpinionJester

**16 सितंबर 2026**

उत्तराखंड में **UPNL (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड)** के माध्यम से 
विभिन्न सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन और
महंगाई भत्ते (DA) को लेकर शासन ने नई प्रक्रिया स्पष्ट की है। सैनिक कल्याण विभाग 
ने **14 सितंबर 2026** को निर्देश जारी कर नियुक्ति की अवधि के आधार पर कर्मचारियों
को चरणबद्ध तरीके से **न्यूनतम वेतनमान और DA** का लाभ देने की व्यवस्था बताई है। यह
कार्रवाई पहले के शासनादेशों और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।

इस पूरी व्यवस्था का खास पहलू यह है कि कर्मचारियों को एक साथ नहीं, बल्कि **तीन चरणों**
में समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

## सबसे पहले किसे मिलेगा लाभ?

पहले चरण में **1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त और वर्तमान में भी कार्यरत UPNL कर्मचारियों**
के लिए कार्रवाई की जा रही है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20 फरवरी 2026 के शासनादेश
में artificial break यानी कृत्रिम सेवा व्यवधान से जुड़ी निरंतरता की शर्त/पाबंदी 
को हटाया गया है। ऐसे पात्र कर्मचारियों को **3 फरवरी 2026 के शासनादेश, यथासंशोधित,
के अनुसार न्यूनतम वेतन और DA** दिया जाएगा।

यानी जिन पुराने UPNL कर्मचारियों की सेवा के बीच तकनीकी या कृत्रिम break दिखाया गया
था, उनके लिए continuity से जुड़ी यह बाधा हटाने की बात सामने आई है।

## तीन चरणों में कब किसे मिलेगा लाभ?

सरकार की बताई प्रक्रिया के अनुसार:

**पहला चरण:** 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त UPNL कर्मचारी — इनके संबंध में कार्रवाई
पहले से चल रही है।

**दूसरा चरण:** 1 जनवरी 2016 से **12 नवंबर 2018** के बीच नियुक्त कर्मचारी — इनके 
लिए समान कार्य समान वेतन पर विचार की प्रक्रिया **9 नवंबर 2026** से शुरू होगी।

**तीसरा चरण:** **13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024** के बीच नियुक्त कर्मचारी — इनके
लिए प्रक्रिया **1 अप्रैल 2027** से शुरू करने की बात कही गई है।

यहां एक बात ध्यान देने योग्य है कि उपलब्ध रिपोर्टों में तीसरे चरण की शुरुआत के साथ
13 नवंबर 2018 की तारीख को भी स्पष्ट रूप से दिया गया है।

## “समान कार्य के लिए समान वेतन” का मतलब क्या है?

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि UPNL कर्मचारी जिस तरह का काम कर रहा है, उसे देखते
हुए संबंधित सरकारी संवर्ग के **प्रारंभिक/entry level पद के वेतनमान** के आधार पर 
भुगतान की व्यवस्था की जाए, जहां लागू शर्तें पूरी होती हों। इसके साथ न्यूनतम वेतन
और DA से जुड़ा लाभ भी संबंधित आदेशों के अनुसार दिया जाएगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPNL कर्मचारी को अपने-आप किसी नियमित सरकारी 
कर्मचारी के बराबर पूरी वेतन संरचना मिल जाएगी। पद, पात्रता, स्वीकृत पद और लागू शासनादेश
जैसी शर्तें महत्वपूर्ण रहेंगी।

## अगर स्वीकृत पदों से ज्यादा UPNL कर्मचारी हैं तो?

शासन के फैसले में इस स्थिति के लिए भी व्यवस्था बताई गई है।

यदि किसी विभाग में उपलब्ध/sanctioned posts की तुलना में **अतिरिक्त UPNL कर्मचारी**
काम कर रहे हैं, तो समान कार्य समान वेतन के लिए UPNL से नियुक्ति की तारीख को ध्यान
में रखते हुए **seniority के क्रम** में कर्मचारियों को पहले स्वीकृत पदों के मुकाबले
समायोजित माना जाएगा।

जो कर्मचारी बाकी रह जाएंगे, उन्हें तब तक उसी विभाग या कार्यालय में संबंधित संवर्ग
के **प्रारंभिक direct-recruitment post** के वेतनमान के आधार पर समायोजित किया जा 
सकता है, बशर्ते वे उस पद की न्यूनतम योग्यता पूरी करते हों।

## पद उपलब्ध नहीं होने पर क्या होगा?

शासन की व्यवस्था में यह भी कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ने पर पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं
हैं, तो **अधिसंख्य पद (supernumerary posts)** के सृजन या समायोजन की कार्रवाई की 
जा सकती है।

यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई विभागों में लंबे समय से sanctioned strength
से अधिक कर्मचारी कार्यरत होने की स्थिति बताई जाती रही है।

## Minimum Pay और DA के अलावा क्या मिलेगा?

यहां थोड़ा सावधान रहना जरूरी है।

उपलब्ध जानकारी में मुख्य फोकस **न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते** पर है। पहले की
संबंधित व्यवस्था के बारे में उपलब्ध विवरण में यह भी कहा गया है कि संबंधित पद के 
entry level के बराबर वेतन और DA दिया जाएगा, जबकि अन्य भत्तों के संबंध में अलग प्रावधान
लागू होंगे।

इसलिए केवल न्यूनतम वेतन + DA के आदेश को देखकर HRA, TA या दूसरे सभी नियमित सरकारी
allowances अपने-आप लागू मानना सही नहीं होगा।

## Artificial Break पर क्या बदला?

UPNL कर्मचारियों के लिए artificial break लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है। नए
निर्देशों में 20 फरवरी 2026 के शासनादेश में मौजूद **continuity से संबंधित शर्त/प्रतिबंध
को हटाने** की बात कही गई है, खासकर 1 जनवरी 2016 से पहले से काम कर रहे और वर्तमान
में सेवा दे रहे कर्मचारियों के संदर्भ में।

इससे ऐसे कर्मचारियों की पात्रता पर पड़ने वाला असर कम हो सकता है, लेकिन वास्तविक 
implementation संबंधित department records और शासनादेश की शर्तों के अनुसार ही होगा।

## यह फैसला किन आदेशों पर आधारित है?

मौजूदा प्रक्रिया में कई पुराने आदेशों का संदर्भ है, जिनमें खास तौर पर:

**3 फरवरी 2026 का शासनादेश**, यथासंशोधित,
**20 फरवरी 2026 का शासनादेश**,और हाईकोर्ट
के आदेशों का अनुपालन शामिल है।

सैनिक कल्याण विभाग के 14 सितंबर 2026 के निर्देश ने इन प्रावधानों के आधार पर implementation
का रास्ता स्पष्ट किया है।

## पुराने कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है?

1 जनवरी 2016 से पहले से काम कर रहे UPNL कर्मचारियों के लिए यह हिस्सा सबसे ज्यादा
महत्वपूर्ण है। उनके लिए शासन ने न केवल न्यूनतम वेतन और DA का रास्ता स्पष्ट किया 
है, बल्कि artificial break से जुड़ी continuity condition में भी बदलाव किया है।

यानी पुराने कर्मचारियों की स्थिति को अब आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट administrative
framework सामने आया है।

## 2016 से 2018 के बीच नियुक्त कर्मचारियों का क्या?

इस श्रेणी को **दूसरे चरण** में रखा गया है।

1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 के बीच नियुक्त कर्मचारियों के लिए समान कार्य समान 
वेतन की प्रक्रिया **9 नवंबर 2026** से शुरू करने की बात कही गई है।

इसका मतलब यह है कि इस group के लिए अभी प्रक्रिया की अगली तारीख महत्वपूर्ण है।

## 2018 से 2024 वाले कर्मचारियों के लिए क्या?

**13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024** के बीच नियुक्त कर्मचारियों को तीसरे चरण में
रखा गया है। इनके लिए समान कार्य समान वेतन की कार्रवाई **1 अप्रैल 2027** से शुरू 
करने की बात कही गई है।

इसलिए सभी UPNL कर्मचारियों के लिए एक ही effective date नहीं है।

## क्या हर UPNL कर्मचारी को समान वेतन मिलना शुरू हो गया है?

**नहीं।**

यही सबसे महत्वपूर्ण clarification है।

यह फैसला एक **phased implementation framework** देता है। अलग-अलग नियुक्ति अवधि के
हिसाब से अलग तारीखों पर प्रक्रिया शुरू होगी। इसलिए “सभी UPNL कर्मचारियों को अभी 
से समान वेतन मिल गया” कहना सही नहीं होगा।

[DA/SALARY CALCULATOR](https://opinionjester.com/calculators/)

## कर्मचारियों के लिए अभी क्या जरूरी है?

UPNL कर्मचारी अपने लिए सबसे पहले यह देखें कि:

**उनकी UPNL नियुक्ति की तारीख क्या है**,
**वर्तमान में वे लगातार कार्यरत हैं या 
नहीं**,**वे किस पद पर काम कर रहे हैं**,और **जिस पद के मुकाबले वेतनमान तय किया जाना
है, उसकी न्यूनतम योग्यता पूरी करते हैं या नहीं।**

इसके साथ विभागीय रिकॉर्ड में joining date और sanctioned post की स्थिति भी महत्वपूर्ण
होगी।

### इस फैसले को समझिए

| नियुक्ति अवधि | प्रस्तावित/निर्धारित चरण | 
| **1 जनवरी 2016 से पहले** | प्रक्रिया पहले चरण में जारी | 
| **1 जनवरी 2016 – 12 नवंबर 2018** | प्रक्रिया **9 नवंबर 2026** से | 
| **13 नवंबर 2018 – 15 अक्टूबर 2024** | प्रक्रिया **1 अप्रैल 2027** से | 
| लाभ | न्यूनतम वेतनमान + DA, लागू शासनादेश के अनुसार | 
| Artificial Break | पुराने पात्र कर्मचारियों के लिए continuity restriction हटाने की व्यवस्था | 
| अतिरिक्त कर्मचारी | Joining-date seniority के आधार पर समायोजन | 
| पद उपलब्ध न हो | आवश्यकता पर अधिसंख्य पदों का सृजन/समायोजन |

## OpinionJester का निष्कर्ष

उत्तराखंड के UPNL कर्मचारियों के लिए 14 सितंबर 2026 के निर्देश महत्वपूर्ण हैं क्योंकि
अब **न्यूनतम वेतन, DA और समान कार्य समान वेतन की प्रक्रिया को नियुक्ति अवधि के आधार
पर तीन चरणों में आगे बढ़ाने** का रोडमैप सामने आया है।

सबसे पहले 1 जनवरी 2016 से पहले के कर्मचारियों से संबंधित कार्रवाई चल रही है। इसके
बाद 2016-2018 और फिर 2018-2024 वाले कर्मचारियों के लिए क्रमशः अगली तारीखें तय की
गई हैं।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि **यह सभी UPNL कर्मचारियों के लिए तत्काल नियमित सरकारी
वेतन लागू होने का आदेश नहीं है।** पद, पात्रता, sanctioned strength और लागू शासनादेश
के अनुसार वास्तविक लाभ तय होगा।
